IPC की धारा 420 क्या है ? IPC Section 420 in Hindi 2023, धारा 420 सजा और जमानत (know hidden facts)

IPC Section 420 in Hindi : Indian penal code (IPC) के अंतर्गत प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए अपराधों की परिभाषा और उसके दंड की एक सूची बनाई गई है। इस सूची के अंतर्गत नागरिकों द्वारा किए गए अपराध और उस अपराध की सजा के बारे में विस्तार से लिखा हुआ है। भारत की कानून व्यवस्था इसी IPC की दंड संहिता के अंतर्गत व्यवहार करती है।

भारतीय दंड संहिता में कुल 511 penal codes का वर्णन है। भारत में यह दंड संहिता 1862 में लागू किया गया था और धीरे-धीरे इसमें कई सारे संशोधन भी किए गए हैं। इसमें प्रत्येक गुनाह के लिए एक सजा का वर्णन है। कौन सा जुर्म कौन सी श्रेणी में आएगा और उसके लिए किस प्रकार की सजा मिलनी चाहिए इसके बारे में Indian Penal Code के अनुच्छेद में विस्तार से वर्णन दिया हुआ है।

आज हम इसी IPC section 420 के बारे में आपको अपने इस लेख “IPC Section 420 in Hindi 2023” के माध्यम से विस्तार से बताने वाले हैं। अतः आपसे निवेदन है कि हमारे साथ बने रहें और हमारे इस लेख को अंत तक पूरा पढ़ें।

Indian Penal Code Section 420 क्या है ?

भारत में IPC के अंतर्गत कुल 511 धाराएं लगाई जाती है, इनमें से सबसे प्रचलित IPC Section 420 है। हमने रोजमर्रा के जीवन में कभी ना कभी इस IPC 420 Dhara के बारे में जरूर सुना होगा। हम अपनी रोज की बोलचाल में भी किसी ना किसी झूठ या किसी धोखेबाज व्यक्ति को 420 कहकर संबोधित कर ही देते हैं। ऐसे में जानना जरुरी है कि IPC ki dhara 420 kya hai ?

असल में 420 IPC Dhara ही है जो किसी प्रकार के जुर्म पर लगाई जाती है। 420 धारा आमतौर पर चोर ,धोखेबाज, झूठ बोलने वाले या झूठ बोलने के लिए उकसाने वाले या किसी झूठ के सहारे कमाने वाले पर लगाई जाती है। कुल मिलाकर हमारे आम की रोजमर्रा की बोलचाल में जिस 420 शब्द का हम उच्चरण  करते हैं एक प्रकार की कानूनी धारा ही है जो इसी प्रकार के जुर्म पर लगाई जाती है।

What is IPC Section 420 in law?

विस्तारित रूप में देखे तो IPC Ki Dhara 420 ऐसे व्यक्तियों पर लगाई जाती है जो छल या धोखेबाजी करते हैं। ऐसे व्यक्ति जो किसी की संपत्ति को हड़पने के लिए झूठ बोलते हैं ,या छल करते हैं। इसके अलावा किसी सुरक्षा वाली जगह पर झूठ बोलकर अंदर जाते हैं ,या किसी सुरक्षा कानून को झूठ या छल के सहारे तोड़ते हैं।

इसके अलावा किसी अन्य के सिग्नेचर कॉपी कर कि किसी को धोखा देने का प्रयास करते हैं या लीगल पेपर को झूठ के सहारे बदलने या नष्ट करने की कोशिश करते हैं। इस प्रकार किसी भी तरीके से किसी अन्य व्यक्ति को धोखा देकर फायदा पाने की कोशिश करने वाले व्यक्तियों पर IPC section 420 लगाकर उसे दंड दिया जाता है।

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IPC Section 420 कौन-कौन से जुर्म पर लगती है ?

  • 420 Ki Dhara (IPC Section 420) झूठ बोलने पर लगाई जाती है।
  • ऐसी कोई परिस्थिति जब व्यक्ति झूठ बोलकर किसी प्रकार का लाभ प्राप्त करने की कोशिश करें।
  • कोई व्यक्ति जब किसी के साथ छल कर खुद का फायदा पूरा करें।
  • कोई भी व्यक्ति जब किसी को धोखा दे या बेईमानी करें ऐसे में ipc section 420 लगाई जाती है।
  • कोई भी व्यक्ति किसी को धोखा देने के इरादे से किसी अन्य को प्रेरित करें और उसे भी इस धोखाधड़ी में शामिल करें।
  • व्यक्ति जब किसी अन्य की संपत्ति को धोखे से हड़पने की कोशिश करें।
  • झूठे सिग्नेचर कर किसी अन्य की संपत्ति या किसी अन्य पेपर या किसी भी प्रकार के कानूनी दस्तावेजों या सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर करें।
  • किसी सेफ्टी, सिक्योरिटी वाली जगह को झूठ बोलकर कुछ सिक्योरिटी को भेदने की कोशिश करें।
  • किसी अन्य को झूठ बोलने के लिए उकसाये और उसे धोखा देने पर प्रेरित करें।
  • किसी बड़े पद पर होने का झूठा दिखावा करें और लोगों को धोखा दे।
  • नकली वस्तुएं बेचकर जानबूझकर लोगों से पैसा कमाएं अथवा किसी अन्य की बनाई चीज को स्वयं का बताकर लाभ ले।

IPC Section 420 का सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव

Indian Penal Code Section 420 ने भारतीय समाज और संस्कृति पर गहरा प्रभाव डाला है, जो कानून के दायरे से कहीं आगे तक फैला हुआ है। ‘420’ शब्द रोजमर्रा की भाषा और लोकप्रिय संस्कृति में व्याप्त हो गया है, जो धोखाधड़ी और धोखाधड़ी के कृत्यों का पर्याय बन गया है। किसी को धोखेबाज़ या जालसाज़ के रूप में लेबल करने के लिए आम बोलचाल की भाषा में ‘420’ शब्द का इस्तेमाल सुनना आम बात है। यह भाषाई प्रभाव इस धारा के अंतर्गत आने वाले अपराधों की गंभीरता की सामाजिक मान्यता को दर्शाता है।

धारा 420 लोकप्रिय संस्कृति में कई फिल्मों, गीतों और साहित्य का विषय रही है। उदाहरण के लिए, राज कपूर अभिनीत क्लासिक बॉलीवुड फिल्म ‘श्री 420’ ने नायक के एक चोर कलाकार में परिवर्तन का प्रतीक बनने के लिए अपने शीर्षक में ‘420’ शब्द का इस्तेमाल किया था। इसी तरह, विभिन्न गीतों और साहित्य में ‘420’ को धोखे और बेईमानी के रूपक के रूप में इस्तेमाल किया गया है।

हालाँकि, धारा 420 के सांस्कृतिक प्रभाव का एक स्याह पक्ष भी है। धारा 420 से जुड़े व्यापक दायरे और गंभीर दंडों के कारण इसका दुरुपयोग हो सकता है, खासकर व्यक्तिगत विवादों और व्यावसायिक संघर्षों में। इसने इस तरह के दुरुपयोग को रोकने के लिए कानूनी सुधारों की आवश्यकता के बारे में एक सामाजिक बहस को जन्म दिया है, साथ ही धोखाधड़ी और धोखाधड़ी के कृत्यों को प्रभावी ढंग से रोकने और दंडित करने की भी आवश्यकता है।

Indian Penal Code Section 420 के अंदर सजा का प्रावधान ?

IPC 420 punishment : IPC Section 420 के अंतर्गत यदि किसी व्यक्ति के ऊपर यह धारा लगाई जाए तो उसे 7 वर्ष की जेल (420 ipc punishment) और साथ में जुर्माना भी भरना होता है। आमतौर पर यह अपराध की गम्भीरता  के अनुसार निर्धारित किया जाता है कई बार अपराध की गंभीरता को देखते हुए इसमें ipc section 420 में जमानत भी नहीं दी जाती।

IPC Sec-420 में मुकदमे की प्रक्रिया

  • IPC Section 420 के अंतर्गत मुकदमे की प्रक्रिया अन्य मुकदमों की तरह ही होती है।
  • इसमें सबसे पहले FIR दर्ज करने के पश्चात जांच की जाती है।
  • जांच करने के पश्चात आरोपी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है और उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाता है।
  • कोशिश की जाती है कि आरोपी 24 घंटे अंदर गिरफ्तार हो जाए।
  • इसके बाद आरोपी को रिमांड में लिया जाता है।
  • यदि कहीं से भी पुलिस अधिकारी को लगता है कि इस केस की जांच 24 घंटे के अंदर नहीं की जा सकती तो वह मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन पेश करता है और जिसमें मजिस्ट्रेट 15 दिन की हिरासत की परमिशन दे सकता है।
  • केस की गंभीरता को देखते हुए यदि 15 दिन के अंदर भी केस की गुत्थी नहीं सुलझी ऐसे में मजिस्ट्रेट अवधि को और आगे बढ़ा सकता है।
  • जमानत की बात करें तो यदि पुलिस जांच पूरी करने में असमर्थ हुई या पुलिस ने 60 या 90 दिन की समाप्ति पर भी किसी प्रकार की जांच रिपोर्ट नहीं पेश की तो ऐसे केस में आरोपी को जमानत दी जाती है।
  • इसके पश्चात पुलिस को CrPC Section 173 के अंतर्गत केस की अंतिम रिपोर्ट भी दाखिल करनी होती है।
  • यदि किसी कारणवश पुलिस आरोपी के खिलाफ सबूत इकट्ठे नहीं कर पाई या कम सबूत मिले जिससे कि आरोपी पर आरोप साबित नहीं होता है तो ऐसे में अदालत विवेक अनुसार निर्णय लेकर केस को बंद कर सकती है।
  • केस को बंद करने से पहले शिकायत दर्ज करने वाले व्यक्ति को इसके बारे में सूचित किया जाता है।
  • यदि शिकायत करने वाला व्यक्ति इस केस को बंद करने से मना कर देता है तो केस अगले चरण में चला जाता है।
  • अगले चरण में फिर से केस की जांच की जाती है और मजिस्ट्रेट CRPC की Section 190 के अंतर्गत अपराध की जांच करने का आदेश देता है और पुलिस CRPC की धारा 204 के अंतर्गत आरोपी को समन जारी करती है ।
  • इसके पश्चात फिर से केस की जांच की जाती है और केस आगे की कोर्ट में ट्रांसफर हो जाता है।
  • आमतौर पर बढ़े और गंभीर किस्म के केस में ही ऐसा होता है।
  • छोटे-मोटे केस में अपील नहीं की जाती और मजिस्ट्रेट द्वारा केस बंद कर दिया जाता है।

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Indian Penal Code Section 420 के अंतर्गत सबूत के तौर पर कौन-कौन सी चीजें मान्य होती हैं ?

  • Indian Penal Code Section 420 के अंतर्गत सबूत के तौर पर कोई भी ऐसा दस्तावेज जिससे यह साबित हो सके कि व्यक्ति ने झूठ बोला है या धोखाधड़ी की है।
  • व्हाट्सएप चैट, टेक्स्ट, संदेश, फोन रिकॉर्डिंग, डिजिटल रिकॉर्डिंग, कैमरा रिकॉर्डिंग ,वीडियो रिकॉर्डिंग ,सीसीटीवी फुटेज, तस्वीरें कोई गवाह, कोई भी सोशल मीडिया सबूत जो इल्ज़ाम को साबित करने में मदद करता है।

Indian Penal Code Section 420 के तहत अपराध की प्रकृति

आपराधिक प्रक्रिया संहिता की अनुसूची 1 का उल्लंघन भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत एक अपराध है। प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट से निचली अदालत इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकती है। आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 320 अदालत की सहमति से धोखाधड़ी के अपराधों के शमन या निपटान की अनुमति देती है।

ClassificationDetails
Offence under CrPCCheating and thereby dishonestly inducing delivery of property, or the making, alteration or destruction of a valuable security
PunishmentImprisonment up to 7 years + Fine
CognizanceCognizable (Police can arrest without a warrant)
BailNon-Bailable (Bail is not a matter of right, it’s at the discretion of the court)
Triable ByMagistrate First Class
Composition under Section 320 CrPCThe offence is Compoundable by the person cheated, with the permission of the Court

Indian Penal Code की धारा 420 को चुनौती

किसी भी कानून की तरह, आईपीसी की धारा 420 को भी चुनौतियों और जांच का सामना करना पड़ा है। उदाहरण के लिए, ऐसे मामले सामने आए हैं जहां इस धारा की संवैधानिकता पर सवाल उठाए गए हैं। ऐसा ही एक मामला हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट में पेश किया गया.

तर्क यह था कि आईपीसी की धारा 420 मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर सकती है। यह मामला एक अनुस्मारक है कि कानून पत्थर में स्थापित नहीं हैं बल्कि व्याख्या और चुनौती के अधीन हैं। यह हमारी कानूनी प्रणाली की गतिशील प्रकृति का हिस्सा है, जो व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा के साथ न्याय की आवश्यकता को संतुलित करने के लिए लगातार विकसित होती रहती है।

जबकि धारा 420 आईपीसी धोखाधड़ी के कृत्यों को रोकने और दंडित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि इसे इस तरह से लागू किया जाए जो व्यक्तियों के मौलिक अधिकारों का सम्मान करता हो।

धारा 420 धोखाधड़ी को रोकना : स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए युक्तियाँ

  1. भरोसा करने से पहले सत्यापित करें : किसी भी वित्तीय लेनदेन में प्रवेश करने से पहले हमेशा व्यक्तियों और कंपनियों की साख सत्यापित करें। इसमें उनकी पहचान, प्रतिष्ठा और पिछले रिकॉर्ड की जाँच करना शामिल है।
  2. असामान्य अनुरोधों से सावधान रहें : धन हस्तांतरण या भुगतान के किसी भी ऐसे अनुरोध से सावधान रहें जो असामान्य या संदिग्ध लगे। इसमें अपरिचित खातों में पैसे भेजने या अपरंपरागत तरीकों से भुगतान करने के अनुरोध शामिल हो सकते हैं।
  3. हस्ताक्षर करने से पहले पढ़ें : किसी भी दस्तावेज़ या अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से पहले हमेशा पढ़ें और समझें। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आप नियम और शर्तों को पूरी तरह से समझते हैं, किसी कानूनी पेशेवर से परामर्श लें।
  4. रिकॉर्ड रखें: सभी वित्तीय लेनदेन और संचार का रिकॉर्ड बनाए रखें। यदि आप धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं तो यह महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है।
  5. संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट करें : यदि आपको संदेह है कि आप धारा 420 के अपराध का शिकार हुए हैं, तो तुरंत पुलिस को इसकी रिपोर्ट करें। जितनी जल्दी आप अपराध की रिपोर्ट करेंगे, आपके पैसे वापस मिलने और धोखेबाजों को न्याय के कठघरे में लाने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

निष्कर्ष :

धारा 420 में अलग-अलग सुधार प्रस्तावित किए गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण में पांचवें विधि आयोग की आईपीसी में धारा 420ए और 420बी को शामिल करने की सिफारिश है। चौदहवें विधि आयोग ने इसका समर्थन किया था।

भारतीय दंड संहिता (संशोधन) विधेयक, 1978 ने इन दोनों सुधारों को स्वीकार कर लिया। हालाँकि, विधेयक को कभी भी संसदीय सहमति नहीं मिली और यह व्यपगत हो गया। इस प्रकार, यह प्रभावी नहीं है. प्रस्तावित परिवर्तन नीचे दिए गए हैं:

माल की आपूर्ति, कार्यों के निष्पादन और वाणिज्यिक भ्रष्टाचार से निपटने में बेईमान ठेकेदारों के माध्यम से सार्वजनिक प्राधिकरणों द्वारा धोखाधड़ी से निपटने के लिए धारा 420 ए का सम्मिलन; और
झूठे विज्ञापनों के प्रकाशन से निपटने के लिए धारा 420 बी।
भारतीय दंड संहिता (संशोधन) विधेयक 1978 ने किसी कंपनी की संपत्ति के संबंध में धोखाधड़ी वाले कृत्यों से संबंधित धारा 420सी को शामिल करने को भी प्रोत्साहित किया।

इस प्रकार Indian Penal Code के अंतर्गत धारा 420 आमतौर पर धोखाधड़ी या झूठ बोलने के अपराध पर लगाई जाती है। जुर्म की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट और पुलिस इस केस की जांच पड़ताल करते हैं तथा अपराधी को सजा दी जाती है।

हम आशा करते हैं कि हमारा यह लेख आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगा तथा इस लेख के माध्यम से आप IPC की 420 धारा के बारे में संपूर्ण रूप से जान गए होंगे। ऐसे ही और जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट को फॉलो करें।

FAQ’s : IPC Section 420

धारा 420 के आरोप में जमानत कैसे प्राप्त कर सकते हैं ?

अगर आप धारा 420 के तहत धारा 420 के तहत आरोप लगाते हैं, जो संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है, तो आपको तुरंत किसी अनुभवी वकील की सलाह मिल जाएगी।

420 आपराधिक मामले में अधिकतम सजा क्या है ?

धारा 420 के अंतर्गत अधिकतम 7 वर्ष की सजा के साथ-साथ सज़ा का प्रावधान है और यह पुलिस के लिए एक संज्ञेय और गैर-कानूनी अपराध है।

आई.पी.सी. धारा 420 के अंतर्गत कौन सा अपराध आता है ?

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति हथियाने जैसे अपराधों को लेकर कारवाई करता है।

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